Top 10 Amazing Facts in Hindi about Science

आज हम आपको Top 10 ऐसे Amazing Facts in Hindi about Science के बारे में बताएंगे। ये science facts in hindi आप सभी को जरूर अच्छी लगेगी। इसमें ऐसे ऐसे amazing facts है जिसे पढ़कर आपको ऐसा क्यों होता है इसका कारण सहित उत्तर मिल जायेगा। जैसे कि हमारे शरीर में नाभि क्यों होता है ? ऐसे-ऐसे amazing facts in hindi आपको इस post में मिलेंगे। तो आप सभी इसे पढ़िए।

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Top 10 Amazing Facts in Hindi about Science –

Amazing Facts in Hindi about Science 1

जानवर आवाजें तो करते है , पर हमारी तरह बातचीत क्यों नहीं कर पाते है ?

हम अपनी भावनाओं को अनेक भाषाओं द्वारा एक-दूसरे से व्यक्त करते लेते है , दुःख-सुख , प्रेम-क्रोध तथा भय आदि नाना प्रकार की अभिव्यक्तियों को चेहरे के भावों के द्वारा अथवा रोने, हंसने के साथ-साथ बातचीत के द्वारा भी आसानी से प्रकट कर लेते है। भाषा चाहे कोई भी हो, बातचीत के लिए उस भाषा के शब्दों की आवश्यकता होती है। इन शब्दो के विकास में हमारे कंठ और मस्तिष्क का गहरा सम्बन्ध है। हर तरह की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए मस्तिष्क नए-नए शब्दों की रचना करने में मदद करता रहता है, क्योंकि मनुष्य का मस्तिष्क सबसे अधिक विकसित माना जाता है।

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यह मनुष्य को बोलचाल के लिए आवश्यक शब्दों के भंडार को बढ़ाने में सहायक है। ठीक इसके विपरीत पशुओं के बोलने के लिए कंठ तो होती है, जिससे वे नाना प्रकार की आवाजों के माध्यम से अपने दुःख-सुख आदि अभिव्यक्त करते है, लेकिन पशुओं का मस्तिष्क मनुष्य की तुलना में बहुत कम विकसित होता है। इसलिए वे शब्दों की रचना नहीं कर पाते है। जिसके कारण वे शब्दों को जानने में असमर्थ होते है। इससे वे आवाज तो करते है, लेकिन हम लोगो की तरह बात नहीं कर सकते।

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चिकनाई लगे कपड़े साबुन से कैसे साफ हो जाते है ?

प्रायः कपड़े धूल, मिटटी, कीचड़ या चिकनाई आदि लगने से गंदे हो जाते है। इन्हे फिर से उपयोग करने लायक बनाने के लिए गंदगी को साफ करना होता है। कुछ धूल-मिटटी तो कपड़े झाड़ने से झड़ जाते है , जबकि कुछ गंदगी पानी में घुलकर धोने से निकल जाती है। लेकिन घी, तेल, चिकनाई तथा ग्रीस आदि चिकने पदार्थों से गंदे हुए चिकने कपड़ो की यह गन्दगी कपड़ों को झाड़ने या पानी से धोने से साफ नहीं होती है। क्योंकि चिकनाई पानी में घुलती नहीं है और झाड़ने से झड़ती नहीं है।

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इसलिए इसे साबुन से साफ करना पड़ता है। जब कपड़ो को पानी में भिगोकर साबुन लगाकर धोते है तो धूल-मिटटी के साथ चिकनाई भी छोटे-छोटे कणों में टूटकर बिखर जाती है। अब साबुन या डिटर्जेंट के घोल की पतली फिल्म इन कणों को घेर लेती है और इस तरह साबुन और चिकनाई का इमलशन-सा बन जाता है। अब इन्हे साफ पानी में खगालने से गंदगी का इमलशन कपड़ो से हटकर पानी के साथ निकल जाता है और चिकने कपड़े साफ हो जाते है।

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हमारे शरीर में नाभि क्यों होता है ?

बच्चा पैदा होने से पहले माँ के पेट में गर्भाशय में पलता है और वहां उसे अपनी वृद्धि के लिए भोजन, ऑक्सीजन आदि की भी जरुरत होती है। गर्भवस्था में बच्चा इन आवश्यकताओं की पूर्ति केवल माँ से ही कर सकता है। माँ के पेट में बच्चा एक थैलीनुमा प्लासेंटा या जेर में बंद होता है और इससे एक नली द्वारा जुड़ा रहता है। इसी नली द्वारा बच्चा अपनी माँ से पचा हुआ भोजन और ऑक्सीजन आदि लेता है।

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बच्चे के विकसित शरीर में बननेवाले व्यर्थ पदार्थ आदि भी इसी नली के द्वारा माँ के शरीर में भेजे जाते रहते है। इस तरह माँ के पेट में बच्चा पूरी तरह माँ के ही भोजन, हवा, पानी आदि पर आश्रित रहता है। इनकी पूर्ति के लिए यह नली बच्चे के पेट से जुड़ी होती है। बच्चे के पैदा हो जाने के बाद नली की आवश्यकता नहीं रहती, क्योंकि अब बच्चा पूरी तरह विकसित हो चूका होता है और अपना भोजन स्वयं ले और पचा सकता है।

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इसलिए इस नली या नाल को काटकर बच्चे को माँ से अलग कर दिया जाता है। वह नहीं बच्चे से जुड़े रहने के बजाय धीरे-धीरे छूटकर अलग हो जाती है यही नाभि का रूप ले लेती है अर्थात यही नाभि कहलाती है।

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सिर के बाल काले, भूरे अथवा सफेद रंग के ही क्यों होते है ?

किसी भी रंग के लिए कोई-न-कोई रंजक उत्तरदायी होता है। हमारे सिर के बालों का काला रंग भी मैलेनिन नामक एक रंजक के कारण होता है। यह बालों की जड़ में फालिकिल में स्थित होता है। इस रंजक की उपस्थिति के अनुसार ही बालों के कालेपन में कमी या अधिकता देखने को मिलती है। सूर्य के प्रकाश के अनुसार भी इसका प्रभाव घटता-बढ़ता देखा गया है।

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इसीलिए जो लोग गरम या उष्ण जलवायु के प्रदेशो में रहते है , उनके बाल अधिकतर काले पाए जाते है। सूर्य का प्रकाश कम मात्रा में होने पर मैलेनिन रंजक भी कम मात्रा में होने के साथ-साथ प्रभावकारी भी कम होता है। इसलिए ठंडे और सूर्य के कम प्रकाश के प्रदेशों के लोगो के बाल अधिकतर भूरे रंग के हो जाते है। बाल सफेद तब होता है जब उसे रंजक बिलकुल भी नहीं मिल पता। ऐसे में बाल सफेद हो जाता है।

पैतृक गुण तथा वंशावली आदि की वजह से भी सिर के बाल भूरे, लालभ या सुनहरी जैसे देखने को मिलते है। उम्र के साथ भी जब बालों के फालिकिल में मैलेनिन रंजक की मात्रा घटने लगती है तो वे सफेद होने लगते हैक्योंकि बालों के लिए मैलेनिन रंजक के अतिरिक्त अन्य कोई रंजक हमारे शरीर में नहीं होता है इसलिए सिर के बाल किसी भी अन्य हरे-पीले आदि रंग के न होकर काले, भूरे अथवा सफेद रंग के ही होते है।

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लकड़ी जल तो जाती है लेकिन पिघलती क्यों नहीं है ?

सभी पदार्थो का गठन उनके अणुओं और परमाणुओं की एक विशेष संरचना में जुड़े रहने के कारण होता है। यह परमाणु आपस में एक दुर्बल बल से जुड़े होते है। जब किसी पदार्थ को पिघलना होता है तो उसे गरम किया जाता है। इससे उसका ताप बढ़ता है। ताप बढ़ने से दुर्बल बल टूटने लगता है।

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जब यह बल टूटता है तो पदार्थ के परमाणुओं से बनी संरचना बिखरने लगती है और संरचना के बिखरने से पदार्थ पिघलने लगता है। लेकिन जब लकड़ी को गरम किया जाता है तो ताप मिलने पर वह ऑक्सीजन के सहयोग से पिघलने की स्थिति आने से पहले ही जलने लगती है। यही कारण है कि लकड़ी को पिघलना कठिन ही नहीं, बल्कि वर्तमान परिस्थितियों में असम्भव है।

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ठंडे पानी की अपेक्षा गरम पानी जल्दी क्यों जम जाता है ?

पानी को जमाने के लिए पानी से ऊष्मा की मात्रा घटानी होती है, इसे ही पानी को ठंडा करना कहा जाता है। जब ऊष्मा घटते-घटते जमन बिंदु तक आ जाती है तभी पानी जम जाता है। किसी भी वस्तु के ठंडा होने के लिए न्यूटन का एक नियम है, जिसके अनुसार किसी भी वस्तु का ठंडा होना उसके ताप और उसके आसपास के वातावरण का समानुपाती होता है।

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इसका मतलब यह हुआ कि गरम पानी को ठंडा होकर जमने में ठंडे पानी की अपेक्षा कम समय लगेगा। इसके अलावा गरम पानी का जल्दी वाष्पीकरण होने से उसके द्रव्यमान में ठंडे पानी की तुलना में अधिक कमी आ जाती है। अतः गरम पानी का द्रव्यमान कम हो जाने से उसे जमाने के लिए जमन बिंदु तक लाने में उससे कम ऊष्मा निकालनी पड़ती है। इसलिए ठंडे पानी की तुलना में गरम पानी जल्दी जम जाता है।

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अचानक किसी वाहन या गाड़ी के तेज चल पड़ने पर सवारियां पीछे की ओर तथा एकदम ब्रेक लगने पर आगे की ओर क्यों झुक जाती है?

न्यूटन का एक जड़त्व नियम है। इसके अनुसार द्रव्यात्मक वस्तुएं अपनी विराम अवस्था अथवा अचर गति को अपने द्वारा सरल रेखा में बदल पाने में असमर्थ होती है। यही कारण है कि जब कोई वाहन चल रहा होता है तो उसमे बैठा व्यक्ति भी उसी के अनुसार गतिशील होता है। जब वाहन रुकता है तो व्यक्ति या सवारी का वह निचे वाला भाग गाड़ी के रुकने पर वह भी विराम अवस्था में आ जाता है तथा शरीर का ऊपर का भाग गतिशील ही रहता है।

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इसी कारण वाहन के रुकने पर सवारियां आगे की ओर झुक जाती है। ठीक इसी के विपरीत जब वाहन अचानक तेज गति से चल पड़ता है तो सवारियों का निचे का भाग गतिशील हो जाता है, जबकि ऊपर भाग विराम अवस्था में ही बना रहता है। इसलिए वाहन के अचानक तेज गति से चल पड़ने पर सवारियां पीछे की ओर झुक जाती है।

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सर्दियों में गरम पानी से नहाने के बाद ठंड और ठंडे पानी से नहाने के बाद थोड़ी गर्मी क्यों लगती है?

गर्मी और ठंडक तुलनात्मक अनुभूतियाँ है। तापमान जो भी हो, जब हम किसी तापमान से अधिक तापमान की ओर जाते है तो हमें गर्मी लगती है. और जब अधिक तापमान से कम की ओर जाते है तो ठंडक लगती है। यही अनुभूति गरम अथवा ठंडे पानी से नहाने पर शरीर के तापमान और आसपास के वातावरण के ताप में बदलाव के कारण होता है।

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प्रायः सर्दी के मौसम में वातावरण का तापमान बहुत कम होता है, अतः ठंडक से बचने के लिए लोग जब गरम पानी से नहाते है तो गरम पानी के कारण कुछ समय के लिए हमारी त्वचा का तापमान कमरे के तापमान से अधिक हो जाता है। अतः हमारे शरीर की ऊर्जा वातावरण की ओर जाने लगती है। जिससे शरीर की ऊर्जा कम होनी प्रारम्भ हो जाती है और हमें ठंडक लगने लगती है। लेकिन जब हम ठंडे पानी से नहाते है तो हमारे शरीर की त्वचा का तापमान हमारे आसपास के वातावरण से कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में वातावरण की ऊष्मा हमारे शरीर की ओर जाने लगती है , जिसके कारण हमे थोड़ी-सी गर्मी लगने लगती है।

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कुछ लोग गंजे क्यों होते है ?

सिर पर बाल न होने से लोग गंजे कहलाते है। बालों के विकास में एंड्रोजन नामक हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसकी कमी से बालों की कमी हो जाती है और लोग गंजे हो जाते है। स्त्रियों में यह हार्मोन नहीं होता है, इसलिए स्त्रियां गंजी नहीं पाई जाती है। लेकिन गंजेपन के अन्य कारण भी है, जिसमे अधिक उम्र और आनुवंशिक लक्षणों की वजह से भी लोग स्थायी तौर पर गंजे हो जाते है।

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कभी-कभी बिमारियों के कारण कुप्रभाव , एक्स किरणों के असर, त्वचा के रोगों तथा बालों की उचित सफाई आदि न होने की वजह से भी अस्थायी गंजापन आ जाता है। हालाकिं अभी तक गंजेपन की चिकित्सा की कोई प्रामाणिक दवा विकसित नहीं हो पाई है, फिर बालों की सही देखभाल, अच्छे खान-पान और रोगमुक्त रहने से गंजापन पर नियंत्रण रखा जा सकता है।

कुछ लोग गंजेपन को बुद्धिमानी और धनवान होने की निशानी मानते है, तो कुछ मूर्खता और बुढ़ापे की। लेकिन इन बातों की सत्यता का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, जो भी हो पर एक बात सत्य है कि कोई व्यक्ति गंजा होना पसंद नहीं करता परन्तु गंजे व्यक्ति गंजापन दूर कर बालों वाले होने के लिए जरूर लालायित रहते है।

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कुत्ते पागल क्यों हो जाते है ?

सामान्यतः कुत्ते पागल नहीं होते है। अन्य पशुओं की तरह कुत्तो को भी अनेक बीमारियां होती रहती है। इनमे एक बीमारी है रेबीज की, जो कुत्तो के शरीर में इस बीमारी के विषाणुओं के प्रवेश कर जाने के कारण होती है। होता यह है कि जब कुत्तो के शरीर पर कोई जख्म या घाव हो जाता है तो हवा अथवा अन्य जानवरों से रेबीज रोग के विषाणु कुत्तो की कटी त्वचा, जख्म या घाव के द्वारा शरीर में चले जाते है।

इनका असर एक से दो महीने के बाद मालूम पड़ने लगता है और बुखार के कारण खाने-पीने से जी चुराने लगता है। धीरे-धीरे जब विषाणु मस्तिष्क में पहुँच जाते है तो कुत्ते के मुँह से लार टपकने लगती है और वह उत्तेजित होकर भौकने लगता है तथा गुर्राता हुआ इधर-उधर घूमने लगता है। ऐसी स्थिति आ जाने पर कुत्ता पागल कहा जाने लगता है और चार-पांच दिन से अधिक नहीं जी पाता है।

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इसीलिए कहा जाता है कि यदि कोई कुत्ता काट खाए तो उसे देखते रहना चाहिए, अगर वह पागल होगा तो लगभग हफ्ते भर में मर जाएगा। कुत्ता न मरे तो कुत्ता काटे के इलाज की जरुरत नहीं होती है।

पागल कुत्ता लार टपकने की अवस्था आने पर मनुष्यों को काटने लगता है। इसी लार के साथ काटे गए स्थान से मनुष्यों में रेबीज के विषाणु शरीर में प्रवेश कर जाते है और मनुष्य कमजोर, बेचैन, चिंतित, बुखारग्रस्त तथा अनिद्रा, भय, खाने-पीने में कठिनाई आदि से परेशान रहने लगता है और पानी से डरता है। समय पर इलाज न होने पर जब रेबीज के विषाणु मनुष्य के मस्तिष्क में पहुँच जाते है तो मनुष्य को बचा पाना कठिन होता है। इसलिए कुत्ते के द्वारा काट लेने पर कटे स्थान को फौरन धोकर साफ करना चाहिए और एंटीरेबीज के टीके लगवाने चाहिए जिससे रोग बढ़ न पाए और मनुष्यों को जानलेवा बीमारी से बचाया जा सके।

इस तरह यह जानलेवा बीमारी रेबीज के विषाणुओं द्वारा कुत्तो में फैलती है और उन्हें पागल कर देती है।

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तो कैसी लगी यह Top 10 Amazing Facts in Hindi about Science आप सभी को। यह amazing facts hindi से आप सभी को ऐसा क्यों होता है उसका कारण जरूर समझ आया होगा। ऐसे ही Hindi Facts पढ़ने के लिए हमारे website में बने रहे।

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